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इंडिया ऑटिज़्म सेंटर ने ‘अपनत्व के धागे’ के साथ मनाया रक्षाबंधन, आयोजित की समावेशी राखी-निर्माण कार्यशाला
कोलकाता, 31 अगस्त 2026: रचनात्मकता, जुड़ाव और भाई-बहन के रिश्ते की भावना उस समय एक साथ देखने को मिली, जब इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) ने ‘अपनत्व के धागे’ नामक एक समावेशी राखी-निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया। ऑटिज़्म और संबंधित विकासात्मक स्थितियों से जुड़े व्यक्तियों के सहयोग के लिए समर्पित एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन, इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में न्यूरोडाइवर्जेंट व्यक्तियों, उनके भाई-बहनों और दोस्तों ने एक साथ भाग लिया। रक्षाबंधन के अवसर पर कला-चिकित्सा आधारित इस आयोजन ने प्रतिभागियों को रचनात्मक रूप से स्वयं को अभिव्यक्त करने, आत्मविश्वास विकसित करने और साझा अनुभवों के माध्यम से साथियों एवं भाई-बहनों के बीच रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक आत्मीय और स्वागतपूर्ण वातावरण प्रदान किया।
यह पहल समावेशन, सहभागिता और सार्थक सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देने की इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) की व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत सांस्कृतिक रूप से जुड़े ऐसे मंच तैयार किए जाते हैं, जो क्षमताओं, रिश्तों और साथ होने की भावना का उत्सव मनाते हैं।
यह दृष्टिकोण समावेश की अवधारणा के भी केंद्र में है, जो इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) द्वारा विकसित किया जा रहा न्यूरोडाइवर्जेंट व्यक्तियों के लिए आजीवन आवासीय देखभाल का एक आगामी तंत्र है। इसका उद्देश्य एक ऐसा सहयोगी और समावेशी वातावरण तैयार करना है, जहाँ व्यक्ति रह सकें, सीख सकें, विकसित हो सकें और सार्थक संबंध बना सकें।
इस सत्र का संचालन राजश्री मुखर्जी, न्यूरोडाइवर्जेंट व्यक्तियों के साथ कार्य करने वाली अनुभवी कला-चिकित्सा विशेषज्ञ, और अनामित्रो चटर्जी, इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) के आवासीय कलाकार, ने किया। अनामित्रो स्वयं ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम पर एक उच्च-कार्यशील व्यक्ति हैं। पेशेवर विशेषज्ञता और व्यक्तिगत अनुभव को एक साथ लाते हुए, दोनों संचालकों ने प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार की कला सामग्रियों का उपयोग करके अपनी-अपनी राखियाँ बनाने के लिए मार्गदर्शन दिया। इस गतिविधि ने प्रतिभागियों को आत्म-अभिव्यक्ति और भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम के रूप में रचनात्मकता को तलाशने का अवसर दिया। वहीं, एक साझा संवाद सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी बनाई गई राखियों के पीछे की भावनाओं और विचारों को साझा किया। सत्र का समापन प्रतिभागियों द्वारा एक-दूसरे को अपनी हाथ से बनाई गई राखियाँ बाँटने के साथ हुआ, जिसने भाई-बहन के रिश्ते के इस उत्सव को एक व्यक्तिगत और सार्थक स्पर्श दिया।
पहल के बारे में बात करते हुए, श्री जयशंकर नटराजन, निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) ने कहा,
“इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) में हमारा मानना है कि समावेशन तब साकार होता है, जब व्यक्तियों को भाग लेने, स्वयं को अभिव्यक्त करने और सार्थक संबंध बनाने के लिए स्थान और अवसर दिया जाता है। ‘अपनत्व के धागे’ ने रक्षाबंधन की भावना को ऐसे वातावरण में जीवंत किया, जहाँ रचनात्मकता जुड़ने, संवाद करने और भाई-बहन के रिश्तों का उत्सव मनाने का माध्यम बनी। अनामित्रो का इस सत्र में सह-संचालन करना व्यवहार में समावेशन को सामने लाता है और इस विश्वास को दर्शाता है कि न्यूरोडाइवर्जेंट व्यक्तियों को समावेशी अनुभवों को आकार देने और उनका नेतृत्व करने में सक्रिय भागीदार होना चाहिए।”
इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) के आवासीय कलाकार और कार्यशाला के सह-संचालक, अनामित्रो चटर्जी, ने कहा, “अपनत्व के धागे’ का हिस्सा बनना मेरे लिए इसलिए सार्थक था क्योंकि इसने सभी को ऐसे स्थान पर एक साथ आने का अवसर दिया, जहाँ हर व्यक्ति अपने तरीके से रचनात्मकता और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सके। राखी बनाना एक सरल और परिचित गतिविधि है, लेकिन यह हमें उन लोगों के बारे में सोचने का अवसर भी देती है, जो हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं।”
कार्यशाला की कला-चिकित्सा विशेषज्ञ एवं संचालक, राजश्री मुखर्जी, ने कहा, “अपनत्व के धागे’ यह अनुभव करने का एक अवसर था कि कला किस तरह जुड़ाव की भाषा बन सकती है। इसका उद्देश्य ऐसी राखी बनाना नहीं था जो देखने में बिल्कुल सही हो, बल्कि प्रक्रिया का आनंद लेना, स्वयं को अभिव्यक्त करना और दूसरों के साथ इस अनुभव को साझा करना था। न्यूरोडाइवर्जेंट प्रतिभागियों को अपनी-अपनी तरह से इस गतिविधि में शामिल होते और अपने भाई-बहन के रिश्तों का उत्सव मनाते देखना इस सत्र को विशेष रूप से सार्थक बना गया।”
कला, साझा सहभागिता और भाई-बहन के रिश्तों के उत्सव के माध्यम से ‘अपनत्व के धागे’ ने ऐसे निर्णय-मुक्त वातावरण तैयार करने के महत्व को रेखांकित किया, जहाँ न्यूरोडाइवर्जेंट व्यक्ति और उनके परिवार स्वतंत्र रूप से जुड़ सकें और स्वयं को अभिव्यक्त कर सकें। इस कार्यशाला ने आत्मविश्वास, अपनत्व और सार्थक सहभागिता को बढ़ावा देने तथा समावेशी अनुभवों के माध्यम से न्यूरोडाइवर्जेंस का उत्सव मनाने की इंडिया ऑटिज़्म सेंटर (IAC) की निरंतर प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।


